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स्वर्ग तक सीढ़ी …रावण ने यहाँ बनाई थी स्वर्ग की सीढ़ी भारत में आज भी है मौजूद

अगर आप प्रभु राम पर विश्वास करते हैं तो आपको रावण पर भी विश्वास करना होगा रावण एक महान पंडित था और उसके पास कई अद्भुत शक्तियां थी ,रावण पूरी असुर जाती का उद्धार करना चाहता था और उसका यह एक सपना था की वह धरती से स्वर्ग लोक तक एक ऐसी सीढ़ी बनाये जिससे सारे असुर उसकी सहायता से स्वर्ग लोक जा सके | किसी भी असुर को स्वर्ग जाने के लिए कोई भी पुन्य काम न करने पड़े रावण की यह इक्षा रामायण में वर्णित है|

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यह बात है त्रेतायुग की एक दिन रावण के मन में यह विचार आया की क्यों न एक ऐसी सीढ़ी बनाये जाये जिससे किसी भी पुन्य प्रताप के आसानी से स्वर्ग लोक जाया जा सके और सभी असुरो को  शरीर सहित स्वर्ग लोक में स्थान मिल सके |


फिर रावन ने स्वर्ग तक सीढ़ी बनाने का निश्चय कर लिया ,हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के नाहर से 7 किलोमीटर की दूरी पर भगवान शिव का एक मंदिर है जिसे पौड़ीवाला मंदिर कहा जाता है यह शिवधाम पौड़ीवाले मंदिर से प्रसिद्द है |

मान्यता है की रावण ने स्वर्ग तक जाने के लिए जो सीढ़ी बनाई थी उसकी शुरआत इसी मंदिर से की थी ,रमायण में वर्णन मिलता है की रावण अमर होना चाहता था और साथ ही साथ में असुरो का कल्याण भी करना चाहता था और इसी चाह में रावण ने बैठकर कई सालो तक घोर तपस्या की |


रावण की कठोर तपस्या से खुश होकर भगवान शिव ने उसे दर्शन दिए और उससे वरदान मागने को कहा तब रावण ने शिव जी से अमरता का वरदान माँगा और कहा की वो स्वर्ग तक की सीढ़ी बनाना चाहता है ,भगवान शिव ने रावण की इक्षा पूरी करने के लिए कहा की तुम्हे एक शर्त पूरी करनी होगी |

शिव जी बोले अगर रावण एक ही दिन में पांच पौढियो का निर्माण कर देगा तो वह अमर हो जायेगा और स्वर्ग तक की सीढ़ी बनकर तैयार हो जाएगी | शिव जी के कहे अनुसार रावण ने काम करना शुरू कर दिया | रावन ने पहली पौढ़ी बनाई हरिद्वार में जिसे हरि की  पौढ़ी के नाम से जाना जाता है |
दूसरी पौड़ी का निर्माण किया हिमांचल प्रदेश की इसी पौड़ी वाले मंदिर में ,तीसरी पौड़ी बनाई चुडेशवर महादेव में और चौथी बनाई किन्नर कैलाश में इस तरह रावण ने एक ही दिन में ये सभी चार पौढियो का निर्माण कर दिया |

अब उसे एक आखिरी पौड़ी का निर्माण करना था सभी देवता जानते थे की रावन अगर उस अंतिम पौड़ी का निर्माण कर लेता है तो अनर्थ हो जायेगा इसीलिए देवताओ ने छल से उसके मन में थकान और आलसी का भाव दाल दिया जिससे रावण के मन में विचार आया की अभी तो पूरा दिन बचा हुआ है वह थोड़ी देर आराम कर लेगा उसके बाद पौड़ी का निर्माण कर लेगा |

इसी विचार से रावण लेट गया और उसकी आँख लग गयी जिसके चलते रावण की नींद अगले दिन सुबह ही खुली और इस तरह रावण को मिला वरदान बेकार चला गया क्योकि वह पाचवी पौडी का निर्माण कर ही नहीं पाया था | इस तरह रावण ने धरती को स्वर्ग से जोड़ने के लिए सीढ़ी का निर्माण शुरू तो किया था लेकिन वह उसे आलस्य के चलते पूरा नहीं कर पाया |हिमाचल प्रदेश में आज भी यहाँ की बड़ी बड़ी चट्टानें उसके किये  काम की गवाही देते हैं |

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