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1999 भारत -पाक कारगिल युद्ध के जाबांजो की शौर्यगाथा जानकर आपका सीना चौड़ा हो जायेगा

जुलाई आते आते भारत के वीर योद्धा ने दुश्मन को लाशो में तब्दील कर दिया था और हर उस चोटी पर जहाँ पाकिस्तानी सेना ने कब्ज़ा जमा लिया था वहां शान से तिरंगा लहराया जा रहा था लेकिन इस युद्ध में भारत ने अपने 527 योद्धाओ को खो दिया था जिनकी सहादत ने हिंदुस्तान ने पाकिस्तान को चौथी बार शिकस्त दी थी |इस शहीदों ने भारतीय सेना के शौर्य और बलिदान की उस सर्वोच्च परम्परा का निर्वाह का निर्वाहन किया जो हर सिपाही तिरंगे के सामने लेता है ,आज हम बताएँगे ऐसे ही वीर सपूतो की कहानी |

 

पहाडियों की ऊँची चोटियों पर बैठे पाकिस्तान की सेना और  भारत के बीच जंग जारी है जब जाट रेजिमेंट के सौरभ कालिया अपने चार जवान सिपाही अर्जुन राम ,मीका राम ,भवर लाल बगारिया और नरेश सिंह के साथ पेट्रोलिंग पर निकले थे जिसके दौरान बजरंग पोस्ट पर लेफ्टिनेंट कालिया और उनके साथियों का सामना पाक सेना से हुआ ,सौरभ कालिया ने पाक सेना का वीरता के साथ में मुकाबला किया लेकिन गोला बारूद ख़त्म हो जाने के बाद वो दुश्मन के गिरफ्त में आ गए |
तीन हफ्ते बाद उनके और उनके साथियों के शव अधिकारियो को  सौपे गए उन्हें बुरी तरह यातनाये देकर मारा गया था ,देखते ही देखते इस युद्ध में    भारत की स्थति हाथ से निकलने लगी |

18 मई  को पाकिस्तान ने पॉइंट ४२९५ और ४४६० पर कब्ज़ा कर लिया था तब जाकर भारतीय सेना खुलासा किया की पाकिस्तानी सेना ने LOC पर कई जगहों पर घुसपैठ कर ली है स्थति विकत होते देख वायु सेना की मदद मांगी गयी २७ मई को लीडर अजय आहूजा और कैप्टन नचिकेता युद्ध  चेत्र में उड़ान भर रहे थे लेकिन इसी वक्त नचिकेता के विमान में कुछ खामिया आ गयी और उनोंहे विमान की आपात लैंडिंग कर दी |

वही दूसरी तरफ अजय आहूजा का विमान भी दुश्मन द्वारा दागी गयी मीशाइल का शिकार हो गयी लेकिन इसी बीच उनोंहे पैराशूट से उतरते समय भी गोली बारी चालू  रखी थी लेकिन हवा में वो जादा समय तक दुश्मनों का सामना नहीं कर पाए और वीरगति को प्राप्त हो   गए |  इन्हें बाद में वीर चक्र से सम्मानित किया गया वही लेफ्टिनेंट नचिकेता इस युद्ध में पाकिस्तान के द्वारा युद्ध बंदी बना लिए गए जिन्हें बाद में ३ जून १९९९ को भारत   लौटाया गया |

कारगिल युद्ध जारी था इसी युद्ध में अब   हिमांचल प्रदेश के रहने वाले भारतीय सेना के ही विक्रम बत्रा एक अध्याय लिखने वाले थे मोर्चे पर    खड़े इस बहादुर ने अकेले ही कई दुश्मनों को ढेर कर दिया सामने से होती भीसड गोली बारी में घायल होने के बावजूद    उनोंह्र अपनी टुकड़ी के साथ छोटी जिसकी उचाई ४४७५ थी उस पर हमला किया मगर एक घायल साथी अधिकारी को युद्ध चेत्र से निकालने के प्रयाश में माँ भारती का लाडला विक्रम बत्रा शहीद हो गया यहाँ तक की   पाकिस्तानी लड़ाको ने भी   उनकी बहादुरी को सलाम किया और उन्हें शेरशाह के नाम से नवाजा | विक्रम बत्रा को उनके इस साहस के लिए मरने के बाद उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया |

वही काली माता की जय के साथ गोरखा रायफल   के मनोज पाण्डेय ने दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए मनोज पाण्डेय ने दुश्मनों से लड़ते हुए उनके कई बंकर नस्ट कर दिये गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मनोज पाण्डेय   अंतिम समय तक लड़ते रहे  भारतीय सेना  साथी को    पीछे न छोड़ने की परम्परा का मरते दम तक पालन करने वाले मनोज पाण्डेय को उनके शौर्य और बलिदान के लिए परमवीर चक्र से नवाजा गया | मनोज पाण्डेय की बहादुरी की कहानी आज भी बटालिक सेक्टर के जुबालिक चौक पर लिखी हुई है |

इधर १७ जात रेजिमेंट के बहादुर कप्तान अनुज नायर टाइगर हिल्स सेक्टर की एक मह्ह्त्पूर्ण चोटी की लड़ाई में अपने 6 साथियों के शहीद होने के   बाद मोर्चा संभाले हुए थे गंभीर रूप से घायल   होने के बाद   उनोंहे अतिरिक्त जवान आने तक अकेले ही दुश्मन से लोहा   लिया जिसके बाद भारतीय  सेना इस सामरिक चोटी पर कब्ज़ा ज़माने में कामयाब रही |इस साहस और वीरता के लिए कैप्टन अनुज नायर को मंरने के बाद  देश के सबसे  बड़े सम्मान महा परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया |

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