शादी के बाद यहाँ दुल्हन से कराया जाता है जिस्मफरोशी का धंधा, पति ढूंढते हैं ग्राहक..

शादी के बाद यहाँ दुल्हन से कराया जाता है जिस्मफरोशी का धंधा, पति ढूंढते हैं ग्राहक..

कितने ही महिलाओं के लिए आन्दोलन चलाये जाएँ और कितने ही सन्गठन महिलाओं के लिए आवाज उठायें, मगर महिलाओं की स्थिती तब तक नहीं सुधर सकती जब तक उनके प्रति सोच न बदल जाए. उनके ऊपर होने वाले अत्याचारों की पीड़ा को खुद महसूस न कर लें तब तक कुछ नहीं बदल सकता. और ये सोच नई पीढ़ी की परवरिश के साथ आये तो और भी बेहतर होगा.
पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति को एक अलग स्थान मिला हुआ है, क्योंकि हमारे यहां कुछ ऐसी परंपराए हैं जो सबसे प्राचीन है और आज भी उसे उसी प्रकार से निभाया जा रहा है। हालांकि, हमारे देश में कुछ ऐसी परंपराए हैं, जिसकी वजह से हमे दूसरों के सामने शर्मसार होना पड़ता है।


इन परंपराओं में से एक ऐसी परंपरा देश की राजधानी में ही जिसे सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। यह काला धब्बा कहीं और नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लगा हुआ है। आजादी और स्वतंत्रता का दावा करने वाले इस शहर में लड़कियों को न तो सपने देखने की आजादी है और ना ही अपने जिस्म के सौदे को रोक पाने की स्वतंत्रता।

जी हां, इस सच को झुठलाया नहीं जा सकता है। यहां और कोई नहीं बल्कि खुद माता-पिता ही अपनी मासूम बेटियों से जिस्म का सौदा करवाते हैं। यहां तक शादी के बाद ससुराल वाले बहु की जिस्म को बेचकर रोटियां खाते हैं। ये बातें कड़वी जरुर हैं, लेकिन हकीकत हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह कहानी कहीं और नहीं बल्कि राजधानी दिल्ली के नजफगढ़ के प्रेमनगर बस्ती की है, जहां घर चलाने के लिए बेटी-बहुओं को अपने जिस्म का सौदा करना पड़ता है और उनके पिता और पति घर बैठकर अपने ही घर की महिलाओं से जिस्मफरोशी का धंधा करवाते हैं।

जानकारी के मुताबिक, यहां के लोग घर में बेटी पैदा होने पर जश्न मनाते हैं, ऐसा ये लोग इसलिए करते हैं ताकि यह बेटियां बड़ी होकर उनकी कमाई का जरिए बन सके। यहां के माता-पिता शादी से पहले अपनी बेटियों का सौदेबाजी कर मौज मस्ती करते हैं और फिर बाद में शादी के दौरान लड़़की को बेच देते हैं।

फिर शादी के बाद पति और ससुरालवाले उसके लिए ग्राहकों की तलाश करते हैं। यहां की बहुओं से दिनभर घर का काम करवाया जाता है और रात को ग्राहकों के पास भेज दिया जाता है। जहां उन्हें एक ही रात में करीब 4-5 ग्राहकों को संतुष्ट कर मोटी कमाई कर अपने घर लौटना होता है।

हैरानी  की बात यह है कि ये सिलसिला दिन-महीनों और सालों-साल चलता आ रहा है। लेकिन कोई इसे प्रथा को रोकने वाला नहीं है। खबरों के मुताबिक बहुत सी लड़कियों ने इसका विरोध करते हुए अपनी जान तक दे दी है। फिर आज तक कोई कदम नहीं उठाया गया है।

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