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भारत की यह नदी सदियों से उगल रही है सोने के कण

 

 

भारत एक ऐसा देश है जो सहस्त्र  रहस्यों से भरा भरा पड़ा है | आज हम आपको एक ऐसे रहस्य के बारे में बताने जा रहे हैं | भारत में एक नदी है जो सदियों से सोना उगल रही है | झारखण्ड से बहने वाली स्वर्ण रेखा नदी नागपुर के पठारी भू भाग में रांची जिले के नगरी गाँव से निकलती है | इस जगह के एक छोर से दछिणी कोयला तथा दुसरे छोर से स्वर्ण रेखा नदी का उद्गम है |

झारखंड में तमाड़ सारण जैसी जगहों पर नदी के पानी से स्थानीय आदिवासी रेत को छानकर सोने के कण इकठ्ठा करने का कम करते है | कहा जाता है की इस काम में इनके परिवार की कई पीढियां लगी हुई हैं | सिर्फ पुरुष ही नही घर की महिलाएं बच्चे और घर के अन्य सभी सदस्य भी यही काम करते हैं | रेत से सोने का कण निकालने वाले व्यक्ति दिन भर में सोने के एक या दो कण ही निकाल पाते हैं | इस सोने का आकार एक चावल के दाने के बराबर या इससे थोडा बड़ा होता है | माह भर में एक व्यक्ति सोने के ६० य ७० कण ही निकाल पाता है | रेत से सोने के कण छानने का काम साल भर होता है | सिर्फ बाढ़ के दौरान २ महीने के लिए यह काम बंद किया जाता है |

मौजूदा स्थानीय दलालों द्वारा इस कण को बहुत ही कम कीमत देकर खरीद लेता है| रांची में बहने वाली ये नदी यहाँ के आदिवासियों के कमाई का एकमात्र श्रोत है | उनकी न जाने कितनी पीढियां इस काम में लगी हैं | वहां के लोगो का कहना की आज तक बहुत सी मशीनों द्वारा शोध किये गए लेकिन रेत में सोने का कण पाए जाने का कारण नही जान सके | |

नदी से जुडी एक और आश्चर्यजनक तथ्य यह है की  रांची में स्थित स्वर्ण रेखा नदी अपने उद्गम स्थल से निकलने के बाद सीधे बंगाल की खाड़ी में ही जाकर मिलती है| इस नदी की कोई सहायक नदी नही है | फिलहाल नदी में सोने के कण का पाया जाना आज भी एक रहस्य बना हुआ है |

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