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फेसबुक पर छलका इस जवान का दर्द, जानकार अन्दर से हिल जायेंगे आप.

नई दिल्ली(ब्यूरो) : अक्सर आम आदमी प्रतिदिन किसी न किसी परेशानी का सामना करता है और जब उसका वस नहीं चलता है तो मजबूरन वो उसे भूल जाता है लेकिन कुछ चीजें नहीं भुलाई जाती है और उसके खिलाफ आवाज उठाना जरुरी हो जाता है. ऐसा ही कुछ हुआ उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले ITBP जवान आशुतोष त्यागी के साथ और मात्र चंद पैसों तथा लापरवाही के चलते इस जावन की पूरी जिन्दगी बदल गई. अपने घर से कोसों दूर लेह में अपने देश की सुरक्षा में तैनात जवान इस उम्मीद से देश की रक्षा कर रहा था की उनके अपने सुरक्षित है लेकिन बदले में उसे सिर्फ नाउम्मीदी और जीवन भर का दुःख मिला.

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार आशुतोष त्यागी की पिछले साल 28 फरवरी को शादी प्रीति नाम की लड़की से हुई थी. लेह में ड्यूटी पर तैनात जवान को जब खबर मिली की उनकी पत्नी को डिलीवरी होने वाली है तो वह 30 जनवरी को छुट्टी लेकर घर की और निकल गया. 30 जनवरी की शाम पत्नी को दर्द शुरू हो गया। मां और मौसी उसे बलिया में डॉ. विजेता प्रकाश के पास लेकर गए। हजारों रुपए एंठने के बाद डॉ. ने कहा सीजन करना होगा, कहीं और लेकर जाओ। वहां से परिजन पत्नी को डॉ. पीएस तिवारी के नर्सिंग होम लेकर गए, रातभर एडमिट करने के बाद दूसरे दिन (31 जनवरी) उसने बिना किसी जांच के ऑपरेशन कर ड‍िलीवरी करा दी।

आशुतोष की माँ ने मिडिया से बातचीत करते हुए कहा की डेलिवरी के बाद उनकी बहु को लगातार ब्लीडिंगऔर दर्द होती रही और जब इसके बारे में जब उन्होंने डॉक्टर को बताया तो डॉक्टर ने कहा की उसकी बहु नाटक कर रही है, एक फरवरी की सुबह बहू को ब्लड इंफेक्शन होने लगा। शाम करीब 5 बजे उसे वाराणसी के भिखारीपुर हॉस्प‍िटल के लिए रेफर कर दिया। साथ ही डायलेसिस के लिए लिख दिया।

आशुतोष ने बताया, मैं पत्नी को वाराणसी ले गया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने डायलेसिस करने से मना कर दिया और दवा पर दवा ख‍िलाते रहे। मैंने डॉक्टर्स के पैर तक पकड़े लेकिन वो नहीं माने। बाद में पता चला कि जिस डॉक्टर को डाय‍लेसिस करना है वो 2 फरवरी दोपहर बाद आएगा। मरीज कहीं और न जाए इसलिए उन्होंने दवाई में उलझाए रखा। मैं डॉक्टर्स से पत्नी को दूसरे हॉस्प‍िटल में रेफर करने की मिन्नत करने लगा, लेकिन वो छोड़ने को तैयार नहीं थे। आख‍िरकार उन्होंने एक लाख 25 हजार का बिल मेरे हाथ में थमाया और कहा इसको जमा करवाओ, फिर पत्नी को ले जाओ।

किसी तरह मैं 3 फरवरी को पत्नी को रेफर कराकर वाराणसी के दूसरे बड़े हॉस्प‍िटल में लेकर गया। वहां भी 2 दिन तक जांच-दवा चली, इस दौरान पत्नी की मौत हो गई। मेरी पत्नी की मौत इन डॉक्टर सुपारी किलर की वजह से हुई।

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