झूठा रेप केस : लड़की ने चाहा लड़के को फ़साना, तो जज ने पूछा ऐसा सवाल सब रह गए हक्के बक्के !

हमारे देश में रोज ऐसी कई घटनाएँ होती है, जो इंसानियत को बहुत शर्मसार कर देती है. कुछ ऐसी घटनाएँ होती है, जो हमें सुनने मात्र से ही हमारें दिलो को दहला कर रख देती है. उन्हीं अपराधों में से एक संगीन अपराध है ‘बलात्कार’, जो इन्सान के हैवानियत स्वरुप को दर्शाता है. इसे ख़त्म करने के लिए हमारे देश में कई कड़े कानून बनाये गये है. जिससे हमारे देश की महिलाओ के आन-मान और उनके सम्मान की रक्षा की जा सके लेकिन कई बार महिलाएं इस कानून का गलत फायदा भी उठाती है.

मौजूदा खबर अनुसार आज हम आपको कुछ इसी प्रकार की घटना से अवगत कराते है, जिसमे जज द्वारा कुछ ऐसे सवाल पूछे जिससे सभी हाक्के-बक्के रह गए. दरसल, दिल्ली के एक अदालत में चल रहे एक केश में महिला जज ने बलात्कार के आरोप में एक व्यक्ति को मुक्त करते हुए यह कहाँ कि उसे रेप केस सर्वाइवर क्यों नहीं कहाँ जा सकता है. ये सवाल अपने आप में कानून की पोल खोल रहा है. क्योंकि महिलाओं के प्रति लोग काफी सहानभूति दिखाते हैं लेकिन पुरुषों के लिए कुछ नहीं..

बता दें कि यह महिला जज कोई और नहीं बल्कि तीस हजारी कोर्ट की एडिशनल सेशंस जज निवेदिता अनिल शर्मा हैं, जिन्होंने इस रेप केस का फैसला सुनाने के बाद यह कहाँ कि जब कोई महिला बलात्कार की शिकार होती है, तो उसे रपे सर्वाइवर कहाँ जाता है लेकिन इसका दूसरा पक्ष जब कोई व्यक्ति इस केस में बाइज्जत बारी होता है, तो हम उसे रेप केस सर्वाइवर क्यों नहीं कहते हैं. दरसल, ये केस लगभग चार साल पहले दिल्ली के रन्हौला इलाके का है.

गौरतलब है कि इस केस में एक लड़की ने एक व्यक्ति पर बलात्कार का आरोप लगाया गया था. जिसमे व्यक्ति को पास्को एक्ट के तहत जेल में भेज दिया गया था क्योकि लडकी की उम्र उस समय 17 साल थी. जब पुलिस ने पुरे मामले की जांच की तो यह पता चला कि युवक ने लड़की को शादी करने से इनकार कर दिया था. जिसके बाद लड़की ने गुस्से में आकर उस युवक के ऊपर झूठा बलात्कार का आरोप लगा दिया था.

बताते चलें कि इस केस की सुनवाई करते हुए जज निवेदिता अनिल शर्मा ने कहा है कि लड़की की तरफ से जो साक्ष्य मिले है, उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है. पुलिस की जाँच में ये पाया गया है कि लड़की केवल झूठ बोल रही थी. इसके बाद जज ने युवक को दोषमुक्त करते हए यह निर्णय सुनाया कि युवक यदि चाहे तो लड़की के ऊपर छतिपूर्ति के लिए केस दर्ज करवा सकता है. इस केस को देखकर ये बात तो सच साबित हो गई है कि महिलाओं की मर्यादा और सम्मान की रक्षा के लिए कई कानून बने हैं लेकिन पुरुषों के लिए कोई भी कानून नहीं बना हैं.

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