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जिस महिला के पीएम मोदी ने छुए थे पैर, आज वो अस्पताल में लड़ रही जिंदगी की जंग, जानिए कौन हैं ये महिला

वैसे तो पीएम मोदी देशभर में स्वच्छता के ब्रांड एम्बेसडर के रूप में जाने जाते हैं. उनकी बदोलत आज भारत का हर नागरिक देश को स्वच्छ बनाने में लगा हुआ हैं. लेकिन एक महिला ऐसी भी हैं जिसकी स्वच्छता के प्रति लगन देख खुद नरेन्द्र मोदी भी उनके पैर पड़ने झुके थे. यहाँ हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ के धमतरी के गाँव कोटभर्री की विख्यात 106 वर्षीय कुंवर बाई यादव की.

दरअसल कुंवर बाई को पिछले कुछ दिनों से सांस की तकलीफ हो रही थी इसी सिलसिले में उन्हें 19 फ़रवरी को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया हैं. उन्होंने पिछले एक सप्ताह से कुछ खाया पिया नहीं हैं और पिछले 4 दिनों से वो बेहोशी की हालत में थी. हालाँकि फिलहाल उनकी हालत में सुधार बताया जा रहा हैं. उन्हें सुगर की तकलीफ भी हैं. बुधवार को जब उन्हें होश आया तो उन्होंने छत्तीसगढ़ के सीएम रमन सिंह से बात करने की इच्छा जाहिर की. हालाँकि सीएम साहब दिल्ली में कुछ काम से गए हुए थे इसलिए विडियो कालिंग के जरिए उनकी कुंवर बाई से बात कराई गई. इस दौरान कुंवर बाई बीमार होने की वजह से कुछ बोल नहीं पाई और सीएम रमन सिंह की बात सुनती रही. सीएम ने बेटी सुशीला यादव और नातिन चंद्रकला यादव से बात कर उनके हाल जाने. साथ ही सीएम ने कलेक्टर डा. सीआर प्रसन्ना को कुंवर बाई का बेहतर से बेहतर इलाज कराने के आदेश दिए.

अब आप सोच रहे होंगे कि ये कुंवर बाई कौन हैं? और इन्हें किसलिए इतना महत्त्व दिया जा रहा हैं. तो चलिए आपकी ये जिज्ञासा भी हम दूर किए देते हैं.

दरअसल कुंवर बाई देश भर में स्वच्छता की ब्रांड एम्बेसडर के रूप में जानी जाती हैं. उनकी उम्र 100 से ऊपर जा चुकी हैं लेकिन इसके बावजूद भारत को स्वच्छ बनाने के लिए उनके इरादे काफी मजबूत हैं. रायपुर से लगभग 90 किलोमीटर दूर धमतरी में रहने कुंवर बाई ने भारत की स्वच्छता में काफी योगदान दिया हैं. जब वे 105 वर्ष की थी तब उन्होंने अपनी पाली हुई आधा दर्जन बकरियों को 22 हजार रुपए में इसलिए बेच दिया था ताकि गाँव का पहला टॉयलेट बनाया जा सके. इस उम्र में भी वे लगातार इस बात को लेकर प्रयत्न करती रही कि गाँव में रहने वाली महिलाएं टॉयलेट में जाकर शौच करे ताकि उनका मान बना रहे. इतना ही नहीं गाँव में टॉयलेट बनवाने के लिए जिस घरो में पैसो की कमी हो रही थी वहां कुंवर बाई ने खुद उनकी मदद कर टॉयलेट बनवाए.

कुंवर बाई को दो बेटे हुए. पहला बेटा बचपन में चल बसा तो दुसरा 30 साल की उम्र में दुनियां छोड़ चला गया. ऐसे में घर को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा और घर की महिलाएं गाड़ी खीच पैसा कमाने लगी. कुंवर बाई को बहू और नातिन का काम करना मंजूर था लेकिन उनका खुले में शौच जाना मंजूर नहीं था. अपनी बहू और नातिन का मान रखने के लिए उन्होंने अपनी सालो से पाली हुई बकरियां बेच दी और उन पैसो से गाँव का पहला टॉयलेट बनवाया. इसके बाद कुंवर बाई को एहसास हुआ कि गाँव की अन्य महिला भी इस मान की हकदार हैं और उनके घर में भी टॉयलेट बनना चाहिए. इसलिए तब से वे गाँव के हर घर में टॉयलेट बनाने के लिए जोर देने लगी. उन्हें पैसो की जरूरत पड़ती तो कुंवर बाई मदद कर देती. जब ये खबर फैली तो कई सरकारी एजेंसियां सामने आईं और कुंवर बाई की इस नेक काम में मदद की. इस तरह गाँव में घर घर टॉयलेट बनवा कर वे फेमस हो गई और अन्य गाँवों में जा कर टॉयलेट बनवाने का सन्देश देने लगी.

फ़रवरी साल 2016 में पीएम नरेन्द्र मोदी श्याम प्रसाद मुखर्जी शहरी मिशन के शुभारंभ के लिए राजनांदगांव जिले में आए हुए थे. जब उन्होंने यहाँ कुंवर बाई की कहानी सुनी तो वो भावुक हो गए. इसके बाद जब कुंवर बाई मोदी से मिलने मंच पे आई तो उनकी कहानी से प्रभावित हो मोदी ने पैर छू लिए. इस तरह कुंवर बाई पुरे देश में फेमस हो गई.

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