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जिसकी दुनिया प्यार की कसमे खाती फिरती है उसने अपनी बेटी तक को नहीं छोड़ा

इस्लाम की परिभाषा से अगर देखें तो हलाल और हलाला दो शब्दों का सबसे ज्यादा जिक्र हुआ है। दिखने में यह दोनों शब्द एक जैसे लगते हैं .यह बात तो सभी जानते हैं कि,जब मुसलमान किसी जानवर के गले पर अल्लाह के नाम पर छुरी चलाकर मार डालते हैं , तो इसे हलाल करना कहते हैं .हलाल का अर्थ “अवर्जित ” होता है .

क्या इस्लाम अपने अंत पर है –
शीर्षक पढ़कर चैंकिये मत! कई इस्लामी और गैर-इस्लामी विद्वानों और भविष्यवेत्ताओं ने बहुत पहले से ही यह भविष्यवाणी कर रखी है कि हिजरी की 14वीं शताब्दी के बाद मुसलमानों का पूर्ण विनाश हो जाएगा और इस्लाम का नामो-निशान मिट जाएगा। यह भविष्यवाणी कोई चंडूखाने की गप्प नहीं है, बल्कि इसकी सत्यता का पूर्वाभास हम हिजरी की 15वीं शताब्दी के प्रारम्भिक काल में अभी से करने लगे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि कोई अदृश्य शक्ति बलपूर्वक सारे संसार को एक ऐसे टकराव की ओर धकेल रही है, जिसमें एक ओर इस्लाम को मानने वाले होंगे और दूसरी ओर बाकी सब होंगे। इससे लगता है कि यह टकराव निकट भविष्य में अपरिहार्य और अवश्यंभावी है।

 

कई इस्लामी देशों में तो इस्लाम के विभिन्न सम्प्रदायों और समुदायों के बीच संघर्ष चल रहा है। इन सभी संघर्षों में एक बात समान है कि इनमें कम से कम एक पक्ष मुस्लिम अवश्य है। धीरे-धीरे ये संघर्ष जोर पकड़ रहे हैं और सारी दुनिया जाने-अनजाने इस्लाम के खिलाफ लामबंद होती जा रही है।

इस्लाम मे संभोग के नाम पर जिहाद क्या है?

 

सम्भोग जिहाद इस नाम से सभी परिचित होंगे
इस्लाम और जिहाद एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते . अगर इस्लाम को शरीर मानते है तो जिहाद उसकी आत्मा है ।इसीलिए इस्लाम को जीवित रखने के लिए। वो इसलिए क्यो की इसमें जिहादियों का मदद करना भी काफी परोपकारी माना जाता है। सीरिया में चल रहे विद्रोह में जिहादियों की काम वासना को शांत करने के लिए
महिलाओं की जरूरत थी। जिसके लिए के योजना बना कर एक फतवा जारी किया जाता है ।और फिर सारी औरते सीरिया जिहादियो के हरम में जाने को तैयार हो जाती है । क्यों कि यह सबर का काम है।

 

 

जिहाद अल निकाह यानी सगी बेटी और बहन से जिहाद के नाम पर निकाह

 

Nasir ul umar  नाम के मुफ्ती ने फतवा जारी कर कहा कि इस्लामिक लड़ाकों को सेक्स की जरुरत है, फतवे में कहा गया की अन्य महिलाएं नहीं तो लड़ाके अपनी सगी बहन से भी “निकाह अल जिहाद” यानि निकाह या सम्भोग कर सकते हैं।ऐसी महिलाओं को मुजाहिद कहकर आमंत्रित करता है। टयूनीशिया समेत कई अप्रâीकी देशों, एशिया और यूरोपीय देशों से कई महिलाएं इस झांसे में आकर सीरिया पहुंची हैं। उनसे चौबीस घंटे के दौरान आईएसआईएस के कई सदस्यों से शारीरिक संबंध बनाने को कहा गया। इसके लिए एक टाइम टेबल बनाया गया कि कौन सी महिला किस आतंकी के साथ कितना समय बिताएगा। इन महिलाओं से २० से १००-१०० आतंकियों ने दुष्कर्म किए। जिन्होंने विरोध किया, उनकी हत्या कर दी। दुष्कर्म के बाद महिलाओं को या तो बेचा या फिर उन्हें वापस उनके देश भेज दिया |अब इनमें से ज्यादातर गर्भवती हैं। इराक़ और सीरिया में इस्लामी राज के लिए लड़ने का दावा करने वाले आईएस आईएस के इस जिहाद अल-निकाह का कुछ सलामी सुन्नी मुस्लिम संगठन समर्थन करते हैं।

 

अकबर एक ऐसा तानाशाह जिसने अपनी माँ को भी नही छोड़ा

 

अकबर जिसे हम महान मानते हैं । जिसको किताबों के अंदर महान बनाकर ‌‌‌पढ़ाया जाता है। क्या आप उसका सच जानते हैं। शायद नहीं आप उस वहशी का‌‌‌ आदर करते है। सच ही बोला है किसी ने जो दिखता है वो होता नही और जो होता है वो दिखता नहीं।अकबर भारत के लिये एक काल था जिसने भारतीय  महिलाओं का जबरदस्ती अपने हरम मे ठूंस कर रेप किया । उसके दरबार मे रहने वाले दो कोडी  के इतिहास कार उसी का नमक खाकर उसके बारे मे कैसे लिखते । वे तो वही बातें लिखते जो वास्तव मे अकबर को इतिहास के अंदर एक अच्छा इंसान साबित कर दे ।

 

मुगलों का सेक्स इतिहास जानकर आप के होश उड़ जाएंगे

 

आप को जानकर हैरानी होगी कि शाहजहाँ के हराम में पूरी 7000 जो उसके पिता से विरासत क तौर पर मिली थी। और इसी तरह वह अपनी बाप की ताबीर को बढ़ता चला गया उसने अपनी हरम की व्यापक छांट करनी शुरू की जिसमे बूढ़ी औरतो को भगा कर या मार कर हिन्दू परिवार की लड़कियों को शामिल किया जाता था ।वी स्मिथ के द्वारा लिखी गयी अकबर द ग्रेट मुगल के   पेज नंबर 349 में साफ साफ लिखा है कि भगायी गयी और अगवा की गई औरतों से ही दिल्ली के जी बी रोड का निर्माण हुआ ।

 

आखिर क्यों लोंगो को मोहब्बत को निशानी बता कर गुमराह किया जाता है ?

 

लगभग दुनिया के सभी इतिहासकारो ने अकबर को इस प्रकार सजा कर पेश किया कि लोग इसको अपने प्यार की निशानी बनाने लगे । और हो भी क्यों न अगर 7000 औरतो को हरम में रखने वाला जब किसी एक मे ज्यादा रुचि दिखाए तो उसकी परिभाषा प्यार ही हुई न । आप यह जानकर हैरान हो जायेंगे या शायद कभी इस बात को यकीन भी न करें  कि मुमताज का नाम मुमताज महल था ही नहीं बल्कि उसका असली नाम “अर्जुमंद-बानो-बेगम” था।और तो और दुनियाभर में  जिस शाहजहाँ और मुमताज के प्यार की  निशानी के तौर पर इतनी डींगे हांकी जाती है  की मानो वो शाहजहाँ की ना तो पहली पत्नी थी ना ही आखिरी ।मुमताज शाहजहाँ की सात बीबियों में चौथी थी । इसका मतलब है कि शाहजहाँ ने मुमताज से पहले से  ही तीन शादियाँ कर रखी थी और, मुमताज से शादी करने के बाद भी उसका मन नहीं भरा तथा उसके बाद भी उस ने 3शादियाँ  की लोंगो ने बताया कि मुमताज की मौत के बाद अकबर काफी विलाप करता रहा पर ऐसा बिल्कुल नही है यहाँ तक कि मुमताज के मरने के एक हफ्ते के अन्दर ही मुमताज की  बहन फरजाना से शादी कर ली थी। जिसे उसने पहले से ही रखैल बना कर रखा हुआ था। जिससे शादी करने से पहले ही शाहजहाँ को एक बेटा भी था।अगर शाहजहाँ को मुमताजसे इतना ही प्यार था तो मुमताज से शादी के बाद भी शाहजहाँ ने 3 और शादियाँ क्यों की….?????

 

अब आप यह भी जान लो कि शाहजहाँ की सातों बीबियों में से सबसे खूबसूरत मुमताज नहीं बल्कि इशरत बानो थी। जो कि शाहजहां पहली पत्नी के रूप में थी ।उस से भी घिनौना तथ्य यह है कि शाहजहाँ से शादी करते समय मुमताज कोई पहले से कुंवारी लड़की नहीं थी बल्कि वो शादीशुदा थी और, उसका पति  शाहजहाँ की सेना में सूबेदार के पद पर कार्यरत था ।जिसका नाम “शेर अफगान खान” था। जैसे ही अकबर को पता चला कि मुमताज का पति शेर अफगान है और वह भी उसी की सेना में शाहजहाँ ने शेर अफगान खान की हत्या कर मुमताज से शादी की थी।  इसीलिए मुमताज की मृत्यु के बाद उसकी याद में लम्पट शाहजहाँ ने अपनी ही बेटी जहाँआरा को फंसाकर भोगना शुरू कर दिया था।जहाँआरा को शाहजहाँ इतना प्यार करता था कि उसने उसका निकाह तक होने न दिया।बाप-बेटी के इस प्यार को देखकर जब महल में चर्चा शुरू हुई,तो मुल्ला-मौलवियों की एक बैठक बुलाई गयी और उन्होंने इस पाप को जायज ठहराने के लिए एक हदीस का उद्धरण दिया और कहा कि – “माली को अपने द्वारा लगाये पेड़का फल खाने का हक़ है”।
(Francois Bernier wrote, ” Shah Jahan used to have regular sex with his eldest daughter Jahan Ara.To defend himself, Shah Jahan used to say that, it was the privilege of a planter to taste the fruit of the tree he had planted.”)इतना ही नहीं जहाँआरा के किसी भी आशिक को वह उसके पास फटकने नहीं देता था।कहा जाता है की एकबार जहाँआरा जब अपने एक आशिक के साथ इश्क लड़ा रही थी तो शाहजहाँ आ गया जिससे डरकर वह हरम के तंदूर में छिप गया, शाहजहाँ नेतंदूर में आग लगवा दी और उसे जिन्दा जला दिया।दरअसल अकबर ने यह नियम बना दिया था, की मुगलिया खानदान की बेटियों की शादी नहीं होगी। इतिहासकार इसके लिए कईकारण बताते हैं। इसका परिणाम यह होता था, की मुग़लखानदान की लड़कियां अपने जिस्मानी भूख मिटाने के लिए अवैध तरीके से दरबारी, नौकर के साथ साथ, यहाँ तक अपने सगे संबंधियों का भी सहारा लेती।

 

इस्लाम का भी लिया खूब सहारा

इस्लामिक शरीयत के अनुसार किसी भी मुस्लिम राज्य में रहने वाले गैर मुस्लिमों को अपनी संपत्ति और स्त्रियों को छिनने से बचाने के लिए इसकी कीमत देनी पड़ती थी जिसे जजिया कहते थे। कुछ अकबर प्रेमी कहते हैं कि अकबर ने जजिया खत्म कर दिया था। लेकिन इस बात का इतिहास में एक जगह भी उल्लेख नहीं! केवल इतना है कि यह जजिया रणथम्भौर के लिए माफ करने की शर्त रखी गयी थी।रणथम्भौर की सन्धि में बूंदी के सरदार को शाही हरम में औरतें भेजने की “रीति” से मुक्ति देने की बात लिखी गई थी। जिससे बिल्कुल स्पष्ट हो जाता है कि अकबर ने युद्ध में हारे हुए हिन्दू सरदारों के परिवार की सर्वाधिक सुन्दर महिला को मांग लेने की एक परिपाटी बना रखी थीं और केवल बूंदी ही इस क्रूर रीति से बच पाया था।यही कारण था की इन मुस्लिम सुल्तानों के काल में हिन्दू स्त्रियों के जौहर की आग में जलने की हजारों घटनाएँ हुईं|

 

बहुत प्रारम्भिक अवस्था से ही शाहजहाँ ने काफिरों (हिन्दुओं) के प्रति युद्ध के लिए साहस व रुचि दिखाई थी।अलग-अलग इतिहासकारों ने लिखा था कि, ”शहजादे केरूप में ही शाहजहाँ ने फतेहपुर सीकरी पर अधिकार करलिया था और आगरा शहर में हिन्दुओं का भीषण नरसंहार किया था ।भारत यात्रा पर आये देला वैले, इटली के एक धनी व्यक्ति के अनुसार -शाहजहाँ की सेना ने भयानक बर्बरता का परिचय कराया था। हिन्दू नागरिकों को घोर यातनाओं द्वारा अपने संचित धन को दे देने के लिए विवश किया गया, और अनेकों उच्च कुल की कुलीन हिन्दू महिलाओं का शील भंग किया गया।”(कीन्स हैण्ड बुक फौर विजिटर्स टू आगरा एण्ड इट्सनेबरहुड, पृष्ठ २५) में साफ साफ इसका विवरण है।

 

आखिर क्यों अकबर को  इतिहासकारों ने एक महान शाषक बताया गया

हमारे वामपंथी इतिहासकारों ने शाहजहाँ को एक महान निर्माता के रूप में चित्रित किया है। किन्तु इस मुजाहिद ने अनेकों कला के प्रतीक सुन्दर हिन्दू मन्दिरों और अनेकों हिन्दू भवन निर्माण कला के केन्द्रों का बड़ी लगन और जोश से विध्वंस किया था।अब्दुल हमीद ने अपने इतिहास अभिलेख, ‘बादशाहनामा’ में लिखा था-‘महामहिम शहंशाह महोदय की सूचना में लाया गया कि हिन्दुओं के एक प्रमुख केन्द्र, बनारस में उनके अब्बा हुजूर के शासनकाल में अनेकों मन्दिरों के पुनः निर्माण का काम प्रारम्भ हुआ था और काफिर हिन्दू अब उन्हें पूर्ण कर देने के निकट आ पहुँचे हैं।इस्लाम पंथ के रक्षक, शहंशाह ने आदेश दिया कि बनारस में और उनके सारे राज्य में अन्यत्र सभी स्थानों पर जिन मन्दिरों का निर्माण कार्य आरम्भ है,उन सभी का विध्वंस कर दिया जाए।इलाहाबाद प्रदेश से सूचना प्राप्त हो गई कि जिला बनारस के छिहत्तर मन्दिरों का ध्वंस कर दिया गया था।”(बादशाहनामा : अब्दुल हमीद लाहौरी, अनुवाद एलियट और डाउसन, खण्ड VII, पृष्ठ ३६)हिन्दू मंदिरों को अपवित्र करने और उन्हें ध्वस्त करनेकी प्रथा ने शाहजहाँ के काल में एक व्यवस्थित विकराल रूप धारण कर लिया था।(मध्यकालीन भारत – हरीश्चंद्र वर्मा – पेज-१४१)”कश्मीर से लौटते समय १६३२ मे भी इसका जिक्र है|

 

शाहजहाँ को बताया गया कि अनेकों मुस्लिम बनायी गयी महिलायें फिर से हिन्दू हो गईं हैं और उन्होंने हिन्दू परिवारों में शादी कर ली है।शहंशाह के आदेश पर इन सभी हिन्दुओं को बन्दी बना लिया गया। प्रथम उन सभी पर इतना आर्थिक दण्ड थोपा गया कि उनमें से कोई भुगतान नहीं कर सका।तब इस्लाम स्वीकार कर लेने और मृत्यु में से एक को चुन लेने का विकल्प दिया गया। जिन्होनें धर्मान्तरण स्वीकार नहीं किया, उन सभी पुरूषों का सर काट दिया गया। लगभग चार हजार पाँच सौं महिलाओं को बलात् मुसलमान बना लिया गया और उन्हें सिपहसालारों, अफसरों और शहंशाह के नजदीकी लोगों और रिश्तेदारों के हरम में भेज दिया गया।

अकबरनामा के अनुसार ३ मार्च १५७५ को अकबर ने बंगाल विजय के दौरान इतने सैनिकों और नागरिकों की हत्या करवायी कि उससे कटे सिरों की आठ मीनारें बनायी गयीं। यह फिर से एक नया रिकार्ड था। जब वहाँ के हारे हुए शासक दाउद खान ने मरते समय पानी माँगा तो उसे जूतों में भरकर पानी पीने के लिए दिया गया।अकबर की चित्तौड़ विजय के विषय में अबुल फजल नेलिखा था- ”अकबर के आदेशानुसार प्रथम ८०००राजपूत योद्धाओं को बंदी बना लिया गया, और बाद में उनका वध कर दिया गया। उनके साथ-साथ विजय के बाद प्रात:काल से दोपहर तक अन्य ४०००० किसानों का भी वध कर दिया गया जिनमें ३००० बच्चे और बूढ़े थे।”(अकबरनामा, अबुल फजल, अनुवाद एच. बैबरिज)चित्तौड़ की पराजय के बाद महारानी जयमाल मेतावाड़िया समेत १२००० क्षत्राणियों ने मुगलों के हरम में जाने की अपेक्षा जौहर की अग्नि में स्वयं को जलाकर भस्म कर लिया। जरा कल्पना कीजिए विशाल गड्ढों में धधकती आग और दिल दहला देने वाली चीखों-पुकार के बीच उसमें कूदती १२००० महिलाएँ ।अपने हरम को सम्पन्न करने के लिए अकबर ने अनेकों हिन्दू राजकुमारियों के साथ जबरनठ शादियाँ की थी परन्तु कभी भी, किसी मुगल महिला को हिन्दू से शादी नहीं करने दी। केवल अकबर के शासनकाल में 38 राजपूत राजकुमारियाँ शाही खानदान में ब्याही जा चुकी थीं। १२ अकबर को, १७ शाहजादा सलीम को, छः दानियाल को, २ मुराद को और १ सलीम के पुत्र खुसरो को।अकबर की गंदी नजर गौंडवाना की विधवा रानी दुर्गावती पर थी”सन् १५६४ में अकबर ने अपनी हवस की शांति के लिए रानी दुर्गावती पर आक्रमण कर दिया किन्तु एक वीरतापूर्ण संघर्ष के बाद अपनी हार निश्चित देखकर रानी ने अपनी ही छाती में छुरा घोंपकर आत्म हत्या कर ली। किन्तु उसकी बहिन और पुत्रवधू को को बन्दी बना लिया गया। और अकबर ने उसे अपने हरम में ले लिया। उस समय अकबर की उम्र २२ वर्ष और रानी दुर्गावती की ४० वर्ष थी।”

 

 

(आर. सी. मजूमदार, दी मुगल ऐम्पायर, खण्ड VII)
सन् 1561 में आमेर के राजा भारमल और उनके ३ राजकुमारों को यातना दे कर उनकी पुत्री को साम्बर से अपहरण कर अपने हरम में आने को मज़बूर किया।औरतों का झूठा सम्मान करने वाले अकबर ने सिर्फ अपनी हवस मिटाने के लिए न जाने कितनी मुस्लिम औरतों की भी अस्मत लूटी थी। इसमें
मुस्लिम नारी चाँद बीबी का नाम भी है।
अकबर ने अपनी सगी बेटी आराम बेगम की पूरी जिंदगी शादी नहीं की और अंत में उस की मौत अविवाहित ही जहाँगीर के शासन काल में हुई।सबसे मनगढ़ंत किस्सा कि अकबर ने दया करके सतीप्रथा पर रोक लगाई; जबकि इसके पीछे उसका मुख्य मकसद केवल यही था की राजवंशीय हिन्दू नारियों के पतियों को मरवाकर एवं उनको सती होने से रोककर अपने हरम में डालकर एेय्याशी करना।राजकुमार जयमल की हत्या के पश्चात अपनी अस्मत बचाने को घोड़े पर सवार होकर सती होने जा रही उसकी पत्नी को अकबर ने रास्ते में ही पकड़ लिया।शमशान घाट जा रहे उसके सारे सम्बन्धियों को वहीं से कारागार में सड़ने के लिए भेज दिया और राजकुमारी को अपने हरम में ठूंस दिया ।इसी तरह पन्ना के राजकुमार को मारकर उसकी विधवा पत्नी का अपहरण कर अकबर ने अपने हरम में ले लिया।अकबर औरतों के लिबास में मीना बाज़ार जाता था जो हर नये साल की पहली शाम को लगता था। अकबर अपने दरबारियों को अपनी स्त्रियों को वहाँ सज-धज कर भेजने का आदेश देता था। मीना बाज़ार में जो औरत अकबर को पसंद आ जाती, उसके महान फौजी उस औरत को उठा ले जाते और कामी अकबर की अय्याशी के लिए हरम में पटक देते। अकबर महान उन्हें एक रात से लेकर एक महीने तक अपनी हरम में खिदमत का मौका देते थे। जब शाही दस्ते शहर से बाहर जाते थे तो अकबर के हरम
की औरतें जानवरों की तरह महल में बंद कर दी जाती थीं।अकबर ने अपनी अय्याशी के लिए इस्लाम का भी दुरुपयोग किया था। चूँकि सुन्नी फिरके के अनुसार एक मुस्लिम एक साथ चार से अधिक औरतें नहीं रख सकता और जब अकबर उस से अधिक औरतें रखने लगा तो काजी ने उसे रोकने की कोशिश की। इस से नाराज होकर अकबर ने उस सुन्नी काजी को हटा कर शिया काजी को रख लिया क्योंकि शिया फिरके में असीमित और अस्थायी शादियों की इजाजत है , ऐसी शादियों को अरबी में “मुतअ” कहा जाता है।

 

इस्लाम के नाम पर हिंदुस्तान मुस्लिम को बनाया जाता है बेवकूफ

 

हिन्दुस्तानी मुसलमानों को यह बताया जाता है अकबर ने ही इस्लाम की अच्छाइयों को तराशा असलियत यह है कि कुरआन के खिलाफ जाकर ३६ शादियाँ करना, शराब पीना, नशा करना, दूसरों से अपने आगे सजदा करवाना आदि इस्लाम के लिए हराम है और इसीलिए इसके नाम की मस्जिद भी हराम है।
अकबर स्वयं पैगम्बर बनना चाहता था इसलिए उसने अपना नया धर्म “दीन-ए-इलाही – ﺩﯾﻦ ﺍﻟﻬﯽ ” चलाया। जिसका एकमात्र उद्देश्य खुद की बड़ाई करवाना था। यहाँ तक कि मुसलमानों के कलमें में यह शब्द “अकबर खलीफतुल्लाह – ﺍﻛﺒﺮ ﺧﻠﻴﻔﺔ ﺍﻟﻠﻪ ” भी जुड़वा दिया था।उसने लोगों को आदेश दिए कि आपस में अस्सलाम वालैकुम नहीं बल्कि “अल्लाह ओ अकबर” कहकर एक दूसरे का अभिवादन किया जाए। यही नहीं अकबर ने हिन्दुओं को गुमराह करने के लिए एक फर्जी उपनिषद् “अल्लोपनिषद” बनवाया था जिसमें अरबी और संस्कृत मिश्रित भाषा में मुहम्मद को अल्लाह का रसूल और अकबर को खलीफा बताया गया था। इस फर्जी उपनिषद् का उल्लेख महर्षि दयानंद ने सत्यार्थ प्रकाश में किया है।

महाराणा प्रताप बने पतन कारण

 

1587 में जनता का धन लूटने और अपने खिलाफ हो रहे विरोधों को ख़त्म करने के लिए अकबर ने एक आदेश पारित किया कि जो भी उससे मिलना चाहेगा उसको अपनी उम्र के बराबर मुद्राएँ उसको भेंट में देनी पड़ेगी।जीवन भर इससे युद्ध करने वाले महान महाराणा प्रताप जी से अंत में इसने खुद ही हार मान ली थी यही कारण है कि अकबर के बार बार निवेदन करने पर भी जीवन भर जहाँगीर केवल ये बहाना करके महाराणा प्रताप के पुत्र अमर सिंह से युद्ध करने नहीं गया की उसके पास हथियारों और सैनिकों की कमी है..जबकि असलियत ये थी की उसको अपने बाप का बुरा हश्र याद था।विन्सेंट स्मिथ के अनुसार अकबर ने मुजफ्फर शाह को हाथी से कुचलवाया। हमजबान की जबान ही कटवा डाली। मसूद हुसैन मिर्ज़ा की आँखें सीकर बंद कर दी गयीं। उसके 300 साथी उसके सामने लाये गए और उनके चेहरों पर अजीबोगरीब तरीकों से गधों, भेड़ों और कुत्तों की खालें डाल कर काट डाला गया।मुग़ल आक्रमणकारी थे यह सिद्ध हो चुका है। मुगल दरबार तुर्क एवं ईरानी शक्ल ले चुका था। कभी भारतीय न बन सका। भारतीय राजाओं ने लगातार संघर्ष कर मुगल साम्राज्य को कभी स्थिर नहीं होने दिया।

 

 

 

 

 


 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


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