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कभी न करे गणपति के इस अंग के दर्शन वरना हो जाएँगे कंगाल !

 

 

भगवान् गणपति की पूजा सभी देवी देवताओं में सबसे पहले की जाती है |कोई भी शुभ कार्य इनके आह्वाहन के बिना अधुरा मन जाता है | गणेश जी के आह्वाहन से हम यह कामना करते हैं की हमारी पूजा निर्विघ्न संपन्न हो और उसका अतिशुभ फल मिले |

यूँ तो गणेश जी के दर्शन की महिमा अपार है | उनके मुख के दर्शन मात्र से भक्तों को प्रसन्नता प्रोत होती है लेकिन गणपति के सभी अंगों के दर्शन शुभ फल नही देते है |

ऋषियों के अनुसार , गणपति के पीठ के दर्शन नही कारने चाहिए , इससे अशुभ परिणाम की प्रोटी होती है |

पीठ के दर्शन क्यों वर्जित हैं – 

गणपति का हर एक अंग  किसिं वेदान और खाश गुण को समर्पित है | उनके माथे पर ब्रह्म लोक का वास है | अतः वह ज्ञान के भण्डार हैं | इसी प्रकार नेत्रों में जीवन के लक्ष्य के लिए प्रकाश , नाभि में ब्रह्मांड , दाएं हाथ में संकटों से अभय रहने का वरदान , बाएँ हाँथ में अन्न और भूख निवारण के पधार्थ तथा चरणों में सप्त लोकों का वास है |

अहिं भगवान् गणपति की पीठ में दरुद्रता का वास है | जब कोई भक्त गणपति की प्रतिमा के दर्शन करता है तो इन सुभ फलों की उसे सहजता से ही प्राप्ति हो जाती है| परन्तु पीठ के दर्शन करने से वह दरिद्रता का भागी हो जाता है | अतः किसी भी दर्शनार्थी को भगवान् गणेश के पीठ के दरसन नही करने चाहिए |

कैसे करें दोष निवारण – 

अगर भूल वश गणपति के पीठ के दर्शन हो जाएँ तो भगवान् से छमाँ मंगनी चाहिए,  इसके पश्चात उनके मुख के दर्शन करने चाहिए | इससे स्वतः दोष का निवारण हो जाता है |

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