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ऐसी महिलाओ के लिए उनका खुद का पति ही शत्रु की तरह दिखता है

प्राचीन समय ने आचार्य चाडक्य तक्षशिला के के गुरुकुल में अर्थशास्त्र के आचार्य थे चाडक्य की राजनीती में अच्छी पकड़ थी |संभवता पहली बात कूटनीति का प्रयोग आचार्य चाडक्य के द्वारा ही किया गया था |जब उनोंहे अपने कूटनीति के बल पर सम्राट सिकंदर को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया था ,इसके विपरीत अपनी कूटनीति के बल पर ही साधारण से बालक चंदगुप्त को पूरे भारत वर्ष का  सम्राट बना दिया था 

आचार्य चाडक्य द्वारा श्रेष्ठ जीवन के लिए चाडक्य निति की रचना की गयी है यदि हम इनमे दी गयी नीतियों का पालन करे तो हम अपने जीवन में सफलता जरूर प्राप्त कर सकते हैं | तो चलिए जानते है कुछ ऐसी बाते जिनसे ये पता चलता है की किस वजह से आपकी पत्नी ही बन जाती है आपकी दुश्मन |

आचार्य चाडक्य ने पति पत्नी के लिए एक निति में बताया है की कब उसका पति ही उसका शत्रु बन जाता है | पति पत्नी का रिश्ता आपसी तालमेल और एक दुसरे को समझने की छमता के आधार पर ही सुखद हो सकता है |जिन घरो में इसकी कमी रहती है वहां अशांति और दुःख का वातारवरण बना रहता है |जब अशांति और मानसिक तनाव बड़ता है तो पति और पत्नी एक दुसरे को अपना शत्रु समझने लगते हैं |

बुरे चरित्र वाली स्त्री का शत्रु ही उसका पति है ,आचार्य चाडक्य के अनुसार यदि कोई स्त्री बुरे चरित्र वाली है ,अधार्मिक कर्म करने वाली है ,पराए पुरुषो के प्रति आकर्षित होने वाली है तो उसका पति ही उसका सबसे बड़ा शत्रु है |

आधर्मिक     कर्म वाली स्त्रीका पति  ऐसे कर्म करने से रोकता है तो वह उसे अपना शत्रुइ लगती है |यदि पति या पत्नी दोनों में से कोई भी एक बुराइयों से ग्रषित है तो दुसरे को भी इसके बुरे परिणाम झेलने पद सकते हैं |

आचार्य चाडक्य के अनुसार लोभी   यानि लालची ब्यक्ति ,उसका पूरा मोह धन में ही रहता है ,   ऐसे लोगो को अपनी जान से अधिक स्नेह अपने धन से करते हैं |  यदि इन लोगो के घर कोई धन मागने वाला आ जाये तो ये याचक कोशत्रु की    तरह ही देखते हैं ,दान पुन्य के रम इन्हें बेकार लगते हैं |

 

मुर्ख ब्यक्ति के सामने उपदेश     देना ,जो लोग मुर्ख होते हैं  जड़बुद्धि होते है वे    लोग ज्ञानी पुरुषो को मुर्ख समझते हैं | मुर्ख ब्यक्ति के सामने यदि कोई उपदेश   देता है तो वो उसे ऐसे समझते हैं जैसे वह कोई सबसे बड़ा शत्रु है ||ज्ञान की बाते मुर्ख ब्यक्ति को चुबती है क्योकि वह इन बातो पर अमल नहीं कर    सकता मुर्ख का स्वभाव उसे ज्ञान से   दूर रखता है |

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