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आखिर भारत क्यों नहीं लगा सकता चीनी सामान पर प्रतिबन्ध सच्चाई जानकर उड़ जायंगे होश –

चीन भारत का बड़ा आर्थिक साझेदार है, लेकिन वह पाकिस्तान का करीबी दोस्त भी रहा है और उडी हमले के बाद सोशल मीडिया पर इसका लगातार विरोध देखा जा सकता है | संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तानी चरमपंथी मसूद अहजर के खिलाफ प्रतिबंध लगवाने की भारत की कोशिशों पर चीन आपत्ति कर चुका है. पिछले कुछ दिनों से देश में एक अपील सोशल मीडिया में खूब शेयर की जा रही है और वह है चीन के सामानों का बहिष्कार। खुद को देशभक्त बताने वाले लोग राष्ट्रवाद के नाम पर एक-दूसरे को मैसेज करके चीन के उत्पाद प्रयोग न करने की अपील कर रहे हैं।

यहां तक की सरकार में बैठे कई लोग तथा बीजेपी के कई बड़े नेता भी इन अपीलों को दोहराते आ रहे हैं। इस तरह की अपील व्यर्थ ही की जा रही है, क्योंकि केंद्र सरकार भी चीनी सामान पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं है। दरअसल केंद्र की सहमति के बाद ही किसी भी देश से व्यापार के रास्ते खुलते हैं पिछले कुछ दिनों से देश में एक अपील सोशल मीडिया में खूब शेयर की जा रही है और वह है चीन के सामानों का बहिष्कार। खुद को देशभक्त बताने वाले लोग राष्ट्रवाद के नाम पर एक-दूसरे को मैसेज करके चीन के उत्पाद प्रयोग न करने की अपील कर रहे हैं। यहां तक की सरकार में बैठे कई लोग तथा बीजेपी के कई बड़े नेता भी इन अपीलों को दोहराते आ रहे हैं।

इस तरह की अपील व्यर्थ ही की जा रही है, क्योंकि केंद्र सरकार भी चीनी सामान पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं है। दरअसल केंद्र की सहमति के बाद ही किसी भी देश से व्यापार के रास्ते खुलते हैंजैसा कि आतंकवाद का समर्थन करने वाले चीन का उत्पाद लेना भी अपने आप में भारत से एक गद्दारी ही है. चीनी सामान और चीन का जितना बहिष्कार किया जाए उतना ही बेहतर है. आपकी जानकारी के लिए बता दें पुणे के व्यापारियों और वहां के लोगों ने पूरे भारतवर्ष की जनता के लिए एक मिसाल कायम की है. इन्होने पूरे बाज़ार से ही चीनी कंपनियों के बोर्ड उखाड़ फेंके |

अब सवाल ये उठता है की ऐसा हम क्यों नहीं कर सकते क्या सरकार इसपर  हमेशा के लिए बैन नहीं लगा सकती ??

लोगों ने सवाल किया कि सरकार चीन से आयात पर प्रतिबन्ध क्यों नहीं लगाती ? अतः इसका कारण जानना जरुरी है। कस्टम टेरिफ काम करने हेतु, 1948 में गैट (जनरल एग्रीमेंट ऑन टेरिफ एण्ड ट्रेड ), समझोता हुआ था, जो 23 देशों  में था । उसको ओर अधिक व्यापक स्वरुप देने तथा कराधान की विसंगतियों को मिटाने के लिए, 1986 से 1994 तक उरुग्वे दौर की वार्ताएं हुई । तब जाकर,15 अप्रैल 1994 को भारत सहित,123 देशों ने WTO (वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनिजेशन ) बनाकर उस पर समझोता किया, जो 1 जनवरी 1995 को लागू  हुआ । बाद में अनेक देश जुड़ते गए, चीन 11 दिसम्बर 2001 को इसका सदस्य बना हुआ है|

अधिक जानकारी के लिए देखें हमारा ये  विडियो –

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